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मंगलवार, 16 जून 2009

नारियल पानी का नहीं कोई सानी



यदि आपसे पूछा जाए कि नारियल किस-किस काम आता है तो आपका पहला जवाब होगा पूजा में श्रीफल के रूप में। हिन्दी फिल्मों में तो नारियल पानी हीरो-हीरोइन के बीच रोमांस दर्शाने का भी एक माध्यम है। हीरो-हीरोइन अक्सर सिर भिड़ाकर एक ही नारियल से पानी पीते नजर आते हैं। पर इस नारियल की कहानी सिर्फ इतनी-सी नहीं है। यह एक अत्यंत गुणकारी फल है, जो कई शारीरिक समस्याओं से निजात दिलाता है।

1. अगर आप लंबे सफर पर हैं और जोर से प्यास लग रही हो तो थोड़ा सा रुकिए और नारियल पानी पीजिए। फिर देखिए आप कैसे एनर्जी से भर जाते हैं और आपकी प्यास भी बुझ जाती है।

2. यह प्यास बुझाने के साथ-साथ सेहत का भी ख्याल रखता है। नारियल का पानी एक कुदरती पेय है। इसकी तासीर ठंडी होती है, जिससे शरीर भी ठंडा रहता है।

3. मानव रक्त में इलेक्ट्रोलाइट का जो स्तर पाया जाता है, वही स्तर इसमें भी मौजूद होता है। अतः यह इलेक्ट्रोलाइट बैलेंस बनाए रखता है।

4. यह पौष्टिक तत्वों जैसे पोटेशियम, कैल्शियम, मैग्नीशियम, सोडियम और विटामिन ए, बी व सी से भरपूर है जो शरीर के विकास में अत्यंत उपयोगी हैं।

5. नारियल पानी सायटोकिनिन्स नामक तत्व का प्रमुख स्रोत है, जो कैंसर से लड़ने में बहुत उपयोगी है।

6. यह मूत्राशय व किडनी से संबंधित रोगों के लिए एक कारगर औषधि है।

7. नारियल पानी एक स्पोर्ट्‌स ड्रिंक का भी कार्य करता है और इस बात को संयुक्त राष्ट्र के कृषि एवं खाद्य संगठन ने भी प्रमाणित किया है। आजकल लोग भी इसके गुणों को जानने लगे हैं तथा इसका लाभ भी लेने लगे हैं।

रक्तदान की महत्ता समझनी होगी



भारत में सालाना एक करोड़ यूनिट रक्त जरूरी
आनंद सौरभ

विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानक के तहत भारत में सालाना एक करोड़ यूनिट रक्त की जरूरत है लेकिन उपलब्ध 75 लाख यूनिट ही हो पाता है। यानी करीब 25 लाख यूनिट खून के अभाव में हर साल सैंकड़ों मरीज दम तोड़ देते हैं। खून के एक यूनिट से तीन लोगों की जान बचाई जा सकती है।

विश्व रक्तदान दिवस समाज में रक्तदान को लेकर व्याप्त भ्रांति को दूर करने का और रक्तदान को प्रोत्साहित करने का काम करता है। भारतीय रेडक्रास के राष्ट्रीय मुख्यालय के ब्लड बैंक की निदेशक डॉ. वनश्री सिंह के अनुसार देश में रक्तदान को लेकर भ्रांतियाँ कम हुई हैं पर अब भी काफी कुछ किया जाना बाकी है।

उन्होंने बताया कि भारत में केवल 59 फीसद रक्तदान स्वेच्छिक होता है। जबकि राजधानी दिल्ली में तो स्वैच्छिक रक्तदान केवल 32 फीसद है। दिल्ली में 53 ब्लड बैंक हैं पर फिर भी एक लाख यूनिट खून की कमी है। डॉ. सिंह ने कहा कि इस तथ्य से कम ही लोग परिचित हैं कि खून के एक यूनिट से तीन जीवन बचाए जा सकते हैं।

रेडक्रास में रक्त देने आए दिल्ली के सरस्वती विहार के पंकज शर्मा पिछले कई सालों से स्वेच्छा से यह काम करते आ रहे है। उनका कहना है कि लोगों को रक्तदान की महत्ता समझनी होगी। यह महादान है।

सोनीपत हरियाणा के गबरुद्दीन 163 बार खून दे चुके हैं। भाषा को उन्होंने फोन पर बताया कि उनके जीवन का ध्येय रक्त देकर लोगों की सहायता करना है।

डॉ.वनश्री कहती हैं कि रेडक्रास में 85 फीसद रक्तदान स्वैच्छिक होता है और इसे 95 फीसद तक करने की कार्ययोजना है। सरकार और विभिन्न संगठनों को ब्लड कैंप और मोबाइल कैंप लगा कर लोगों को रक्तदान के लिए प्रेरित करना चाहिए। लोगों को बताना होगा कि रक्तदान का कोई भी दुष्प्रभाव नहीं बल्कि यह आपको लोगों की जान बचाने वाला सुपरहीरो बनाता है।
सौजन्य से - भाषा

शुक्रवार, 29 मई 2009

यूं कम हो जाएगी टीवी देखने की आदत



अमरीकन अकादमी ऑफ पीडियाट्रिक्स के अनुसार बारह वर्ष तक के बच्चों को प्रतिदिन एक घंटे से अधिक टेलीविजन नहीं देखना चाहिए। यदि आपका बच्चा इससे अधिक समय तक टीवी देखता है तो उसे मोटापे व आंख की समस्या हो सकती है। इसके अलावा उसकी क्रियेटिविटी भी कम हो जाती है। आइये, हम आपको बताते हैं कि बच्चों को ज्यादा टीवी देखने से कैसे रोका जाए
* अपने बच्चे के टीवी देखने की समय सीमा निर्धारित करें। यदि यह सीमा एक घंटे है तो बच्चों को समझाएं कि इससे ज्यादा टीवी देखने के लांगटर्म में क्या नुकसान हैं।
* अपने लिए भी टीवी देखने की समय सीमा बनायें और इसका कड़ाई से पालन करें। आपको देखकर बच्चा प्रेरित होगा।
* बच्चा जब आपके कहने के अनुसार निर्धारित समय तक टीवी देखने लगे, तो उसकी तारीफ करें। यह बात अपने पडोसियों, बच्चों के ग्रैण्ड पैरेन्ट्स, दोस्तों और शिक्षकों को बतायें, जब सभी उसकी तारीफ करेंगे तब बच्चा इस आदत को खुशी-खूशी बनाये रखेगा।
* बच्चे से पूछें कि उसको कौन से शो ज्यादा पसंद है। उस शो की रिकाडग कर लें और बाद में बच्चों को दिखायें। रिकार्डेड शो दिखाते समय कर्मिशयल ब्रेक में दिखाये जाने वाले विज्ञापनों को फास्ट फारवर्ड कर दें। इससे टीवी का तीस मिनट का शो आप बीस मिनट में बच्चे को दिखा देंगे।
* बच्चों के कमरे या बेडरूम में कभी भी टेलीविजन न रखें, क्योंकि आपके सोने के बाद बच्चे टीवी देख सकते हैं। टीवी हमेशा कॉमन प्लेस में रखें, ताकि बच्चे क्या देख रहे हैं, यह निगरानी घर का कोई भी सदस्य कर सके। लेकिन ध्यान रखें- बच्चे को यह न पता चले कि उस पर नजर रखी जा रही है अन्यथा वह विद्रोही हो सकता है।
* टेलीविजन के सामने सोफा या बेड न रखें क्योंकि सोफा रखने पर बच्चा आराम से बैठकर या लेटकर देर तक टीवी देख सकता है। टीवी के पास चेयर रखी जानी चाहिए।
* बच्चों को यह बतायें कि टेलीविजन में दिखायी जाने वाली हर चीज सच नहीं होती। हिसा से भरे कार्यक्रम वास्तविक जिन्दगी की तस्वीर नहीं हैं। केवल शैक्षिक कार्यक्रमों से सीख लेनी चाहिए और मनोरंजक शो केवल मनोरंजन के लिए होते हैं, उन्हें अपने जीवन में उतारना नहीं चाहिए।

बुधवार, 27 मई 2009

चेहरे की खूबसूरती का राज फेस मास्क



बाजार में तरह-तरह के फेस मास्क उपलब्ध हैं जैसे संतरे का, चंदन का और मुल्तानी मिट्टी का पर ये काफी महंगे होते हैं। साथ ही उन्हें खरीदते समय भी विशेष सावधानी बरतनी आवश्यक है जैसे-आप जब भी कोई फेस मास्क खरीद रही हैं तो अच्छी कंपनी का ही लें और प्रसाधन का प्रयोग करने से पूर्व उसमें प्रयुक्त सामग्री के विषय में पढ़ लें। कहीं किसी से आपकी त्वचा को एलर्जी न हो। एक्सपायरी तिथि भी अवश्य पढें। साथ ही फेस मास्क के प्रयोग की विधि पढे बिना उसे प्रयोग मत करें। सबसे जरूरी है अपनी त्वचा के प्रकार यानी तैलीय, रूखी, मिश्रित आदि ध्यान में रखते हुए उसी के अनुरूप फेस मास्क का चुनाव करें। आकर्षक पैकिंग से प्रभावित होकर कोई प्रसाधन न खरीदें।
फेस मास्क का प्रयोग करते समय भी कुछ बातों को ध्यान में रखें। फेस मास्क का प्रयोग साफ हाथों से करें। फेस मास्क का प्रयोग करते समय आपका चेहरा बिल्कुल साफ होना चाहिए। उस पर कोई मेकअप नहीं लगा होना चाहिए। अगर आपकी त्वचा रूखी है तो किसी साफ कपडे क़ो पानी में भिगोकर चेहरा उससे अच्छी तरह साफ करें। इससे चेहरे की त्वचा के रोमकूप खुल जाएंगे और फेस मास्क अधिक प्रभाव छोडेग़ा। अगर आपकी त्वचा तैलीय है तो ऐसा न करें। इससे आपको मुंहासे हो सकते हैं।
फेस मास्क लगाने से पूर्व अपने बालों को अच्छी तरह से पीछे बांध लें। मास्क पेस्ट साफ उंगलियों से स्पेटयूला से लगाएं। आंखों के आस-पास की त्वचा पर इसे न लगाएं। मास्क पेस्ट नरम हाथों से लगाए और त्वचा पर एकसार लगाएं।
कुछ आसान फेस मास्क तैयार करने व प्रयोग करने की विधि: त्वचा पर निखार लाने के लिए मलाई में जरा सी हल्दी मिला दें और 15-30 मिनट तक लगा रहने दें। फिर हल्के गर्म पानी से चेहरा धो लें ताकि तैलीयता समाप्त हो जाए।
अगर आपके रोमछिद्र खुले हुए हैं तो क्ले मास्क उसे कसेगा और त्वचा को ताजगी देगा। मुल्तानी मिट्टी में थोड़ी सी मलाई मिला लें और मिश्रण को त्वचा पर लगा कर सूखने दें। फिर चेहरे को पानी से साफ कर लें। टमाटर भी बडे रोमछिद्रों वाली त्वचा के लिए अच्छा है।

रूखी त्वचा के लिएफेस मास्क
एक चम्मच शहद व एक चम्मच अंडे का सफेद भाग मिला कर चेहरे पर लगाएं और सूखने पर धो लें।
रूखी त्वचा के लिए अंडे का पीला भाग लगाना भी उत्तम है क्योंकि यह विटामिन ए से भरपूर होता है। एक चम्मच अंडे का पीला भाग लें। उसमें शहद व आलिव आयल की कुछ बूंदें अच्छी तरह से मिलाएं और चेहरे पर लगाएं। अगर आपकी त्वचा बहुत रूखी है तो नींबू और संतरे का प्रयोग न करें।
एक चम्मच मलाई में थोड़ा सा बेसन, हल्दी व दूध डालकर पेस्ट बना लें। सूखने पर धो दें। इससे रूखी त्वचा में नमी बनी रहेगी।
तैलीय त्वचा के लिए फेस मास्क
खीरे को कद्दूकस करके उसमें दही मिला कर पेस्ट बना लें व 15 मिनट तक चेहरे पर लगाएं। फिर पानी से साफ कर लें। यह मास्क तैलीय त्वचा के लिए विशेष लाभदायक है।
अंडे की सफेदी का मास्क भी खुले रोम छिद्रों को बंद करता है इसलिए तैलीय त्वचा पर इसका प्रयोग भी लाभप्रद है।

मिश्रित त्वचा के लिए फेस मास्क
ह्व एक चम्मच बेसन में चुटकी भर हल्दी, दूध, कुछ बूंदें बादाम रोगन की डाल कर पेस्ट बनाएं और चेहरे पर लगाएं। सूखने पर ठंडे पानी से चेहरा साफ कर लें।
ह्व एक चम्मच बेसन में कुछ बूदें ग्लिसरीन व नींबू के रस की मिलाकर लगाएं और 10-15 मिनट बाद पानी से चेहरे को साफ कर लें।

गर्मी से कैसे बचें



गर्मी का पारा लगातार ऊपर चढता जा रहा है। गर्मी पिछले कई वर्ष पुराने रिकॉर्ड को तोड रही है। अभी पिछले दिनों अप्रैल में तापमान ने पिछले 50 वर्ष पुराने रिकॉर्ड को तोडा। ऐसे में गर्मी से खुद को कैसे बचाया जाए हम सभी के लिए सबसे बडी समस्या बन गई है। क्योंकि बच्चों के खेल-कूद और पढाई के साथ बडाें की नौकरी तक के सारे काम ऐसे हैं, जिनके साथ समझौता नहीं किया जा सकता है। लेकिन यदि थोडी सी सावधानी बरती जाए तो कई बडी बीमारियों से बचा जा सकता है।

खाने-पीने का रखें ख्याल

गर्मी में खान-पान का महत्व कई गुणा बढ ज़ाता है क्योंकि सर्दियों में फास्ट फूड जैसे गर्म पदार्थ ज्यादा हानिकारक नहीं होते हैं, लेकिन गर्मियों में वही घातक साबित हो सकते हैं। हमें अधिक से अधिक घर का बना भोजन खाना चाहिए। संभव हो तो खाने में हरी सब्जी और ठंडे खाद्य पदार्थों का सेवन करें। ऐसे खाद्य पदार्थ ज्यादा खाएं जिसमें पानी की अधिकता हो। साथ ही पानी का सेवन भी अधिक से अधिक करना चाहिए। वैसे तो हर व्यक्ति को चार-पांच लीटर पानी का सेवन अवश्य करना चाहिए, लेकिन मौसम को देखते हुए इसे बढ़ाया जा सकता है। साथ ही जूस और दूसरे द्रव्य पदार्थ का सेवन करते रहें।

घर से निकलते समय रखें ख्याल

घर से निकलने से पहले पानी पीकर निकलें। हो सके तो पानी की बोतल भी साथ में रखें। छतरी साथ में रखने से अनावश्यक धूप से बचा जा सकता है, जो स्वास्थ्य के साथ-साथ त्वचा को भी धूप से बचाने में सहायक होता है।

धूप में निकलने से बचें

मौसम को देखते हुए कोशिश करें कि धूप में न निकलें। अगर निकलना ही पडे तो शाम या सुबह में निकलने का प्रयास करें। महिलाओं और बच्चों को तो खासतौर से धूप में बाहर निकलने से बचना चाहिए, क्योंकि इनकी त्वचा नाजुक होती है। अगर आप धूप में निकले हैं और अचानक से वातानुकूलित कमरे या ऑफिस में आना पडे, तो एकाएक जाने की बजाय थोडी ठंडी जगह पर रूकने के बाद जाएं।

क्या खाएं क्या नहीं

गर्मी के मौसम में इस मौसम के फल का सेवन अधिक मात्रा में करना चाहिए। तरबूज, खरबूजा, खीरा, ककडी ज़ैसे फल शरीर को उचित मात्रा में पानी देने के साथ-साथ गर्मी से लडने की शक्ति भी देते हैं।

मरीज के लिए सावधानियां

ब्लडप्रेशर और मधुमेह जैसी बीमरियों से ग्रस्त मरीजों को गर्मी में खास सावधानी रखनी चाहिए, क्योंकि बढते तापमान में उनकी बीमारी भी बढ़ सकती है। उन्हें इनफेक्शन का खतरा ज्यादा होता है। उन्हें उपरोक्त सावधानियों के साथ-साथ डॉक्टरी सलाह भी लेते रहना चाहिए।

साभार - देशबंधू

पेट की कई समस्याओं का आसान इलाज है हरड़



हरड़ या हरीतकी का वृक्ष 60 से 80 फुट ऊंचा होता है। प्रधानत: यह निचले हिमालय क्षेत्र में रावी तट से बंगाल आसाम तक लगभग पांच हजार फुट की ऊंचाई तक पाया जाता है। इसकी छाल गहरे भूरे रंग की होती है तथा पत्तों का आकार वासा के पत्तों जैसा होता है। सर्दियों में इसमें फल आते हैं जिनका भंडारण जनवरी से अप्रैल के बीच किया जाता है। मौटे तौर पर हरड़ के दो प्रकार हैं- बड़ी हरड़ और छोटी हरड़। बड़ी हरड़ में सख्त गुठली होती है जबकि छोटी हरड़ में कोई गुठली नहीं होती।
वास्तव में वे फल जो गुठली पैदा होने से पहले ही तोड़कर सुखा लिए जाते हैं उन्हें ही छोटी हरड़ की श्रेणी में रखा जाता है। आयुर्वेद के अनुसार छोटी हरड़ का प्रयोग निरापद होता है क्योंकि आंतों पर इसका प्रभाव सौम्य होता है। वनस्पति शास्त्र के अनुसार हरड़ के तीन अन्य भेद हो सकते हैं। पक्वफल, अर्धपक्व फल तथा पीली हरड़। छोटी हरड़ को ही अधिपक्व फल कहते हैं जबकि बड़ी हरड़ को पक्वफल कहते हैं। पीली हरड़ का गूदा काफी मोटा तथा स्वाद कसैला होता है। फलों के स्वरूप, उत्पत्ति स्थान तथा प्रयोग के आधार पर हरड़ के कई अन्य भेद भी किए जा सकते हैं। नाम कोई भी हो चिकित्सकीय प्रयोगों के लिए डेढ़ तोले से अधिक भार वाली, बिना छेद वाली छोटी गुठली तथा बड़े खोल वाली हरड़ ही प्रयोग की जाती है। टेनिक अम्ल, गलिक अम्ल, चेबूलीनिक अम्ल जैसे ऐस्ट्रिंजेन्ट पदार्थ तथा एन्थ्राक्वीनिन जैसे रोचक पदार्थ हरड़ के रासायनिक संगठन का बड़ा हिस्सा हैं। इसके अतिरिक्त इसमें जल तथा अन्य अघुलनशील पदार्थ भी होते हैं। इसमें 18 प्रकार के अमीनो अम्ल मुक्तावस्था में पाए जाते हैं।
बवासीर, सभी उदर रोगों, संग्रहणी आदि रोगों में हरड़ बहुत लाभकारी होती है। आंतों की नियमित सफाई के लिए नियमित रूप से हरड़ का प्रयोग लाभकारी है। लंबे समय से चली आ रही पेचिश तथा दस्त आदि से छुटकारा पाने के लिए हरड़ का प्रयोग किया जाता है। सभी प्रकार के उदरस्थ कृमियों को नष्ट करने में भी हरड़ बहुत प्रभावकारी होती है। अतिसार में हरड़ विशेष रूप से लाभकारी है। यह आंतों को संकुचित कर रक्तस्राव को कम करती हैं वास्तव में यही रक्तस्राव अतिसार के रोगी को कमजोर बना देता है। हरड़ एक अच्छी जीवाणुरोधी भी होती है। अपने जीवाणुनाशी गुण के कारण ही हरड़ के एनिमा से अल्सरेरिक कोलाइटिस जैसे रोग भी ठीक हो जाते हैं।
इन सभी रोगों के उपचार के लिए हरड़ के चूर्ण की तीन से चार ग्राम मात्रा का दिन में दो-तीन बार सेवन करना चाहिए। कब्ज के इलाज के लिए हरड़ को पीसकर पाउडर बनाकर या घी में सेकी हुई हरड़ की डेढ़ से तीन ग्राम मात्रा में शहद या सैंधा नमक में मिलाकर देना चाहिए। अतिसार होने पर हरड़ गर्म पानी में उबालकर प्रयोग की जाती है जबकि संग्रहणी में हरड़ चूर्ण को गर्म जल के साथ दिया जा सकता है।
हरड़ का चूर्ण, गोमूत्र तथा गुड़ मिलाकर रात भर रखने और सुबह यह मिश्रण रोगी को पीने के लिए दें इससे बवासीर तथा खूनी पेचिश आदि बिल्कुल ठीक हो जाते हैं। इसके अलावा इन रोगों के उपचार के लिए हरड़ का चूर्ण दही या मट्ठे के साथ भी दिया जा सकता है।
लीवर, स्पलीन बढऩे तथा उदरस्थ कृमि आदि रोगों की इलाज के लिए लगभग दो सप्ताह तक लगभग तीन ग्राम हरड़ के चूर्ण का सेवन करना चाहिए। हरड़ त्रिदोष नाशक है परन्तु फिर भी इसे विशेष रूप से वात शामक माना जाता है। अपने इसी वातशामक गुण के कारण हमारा संपूर्ण पाचन संस्थान इससे प्रभावित होता है। यह दुर्बल नाडि़यों को मजबूत बनाती है तथा कोषीय तथा अंर्तकोषीय किसी भी प्रकार के शोध निवारण में प्रमुख भूमिका निभाती है।
हालांकि हरड़ हमारे लिए बहुत उपयोगी है परन्तु फिर भी कमजोर शरीर वाले व्यक्ति, अवसादग्रस्त व्यक्ति तथा गर्भवती स्त्रियों को इसका प्रयोग नहीं करना चाहिए।

साभार - देशबंधु

नेचरल रहें, खूबसूरत लगें



गर्मियों में आप कितना ही वॉटरप्रूफ मेकअप कर लें, लेकिन वह मेल्ट हो ही जाता है।

सन प्रोटेक्शन
गर्मियों में आप जो लिप बाम यूज करती हैं, उसे यूज करने से पहले फ्रिज में रख दें। जब भी आप इस ठंडे लिप बाम को लगाएंगी, तो बेहद फ्रेश फील करेंगी। इस मौसम में आप फ्रूट फ्लेवर वाले लिप बाम भी ट्राई कर सकती हैं। इनकी खुशबू आपको गर्मी में भी कूल बनाए रखेगी। स्किन एक्सपर्ट डॉ. बिंदु कहती हैं कि बाजार में चिपस्टिक, लिप ग्लॉस, लिप बाम में कई वैराइटीज हैं, जिनका एसपीएफ 25 या इससे ज्यादा होता है। इससे धूप का असर आपके होंठों पर नहीं पड़ता और आपके होंठ न तो काले होते हैं और न ही फटते हैं।

अगर आप स्विमिंग या फिजिकल एक्टिविटी करती हैं, तो उस समय हल्का वॉटरप्रूफ मेकअप लगाएं। मेकअप एक्सपर्ट विम्मी जोशी कहती हैं कि ग्लैमरस दिखने के लिए वॉटरप्रूफ ब्यूटी प्रॉडक्ट्स इस्तेमाल करें। गर्मियों में लिक्विड फाउंडेशन लगाएं। इससे स्किन सॉफ्ट, फ्रेश और क्लीन दिखेगी। चेहरे पर फाउंडेशन लगाने से पहले हल्का कंसीलर लगाएं और फिर डस्टिंग पाउडर यूज करें। इससे पूरे चेहरे पर मेकअप एक जैसा लगेगा।

बालों को दें नया लुक
आपके बाल बहुत ज्यादा ड्राई हैं, तो इन पर रोजाना कंडिशनर लगाएं। इस गर्म मौसम में अपने बालों को नया लुक देना चाहती हैं, तो गीले बालों पर सुंदर-सा रिबन बांध लें। आप एक ऊंची पॉनीटेल भी बना सकती हैं। ये स्टाइल गर्मियों में आपको कूल लुक देंगे और गॉर्जियस दिखाने के साथ गर्मी से भी बचाएंगे। अगर आप रोज बाल धोती हैं, तो इन्हें सुखाने के लिए ड्रायर यूज न करें। बालों को नेचरल रूप से सूखने दें। मार्किट में हेयर केयर के कई प्रॉडक्ट्स हैं, जो धूप व कैमिकलयुक्त पानी से आपके बालों को बचाते हैं। इसके अलावा, बाहर निकलने से पहले हैट या स्टोल जरूर कैरी करें।

स्टाइलिश सैंडल
गर्मी में आपके पैर सुंदर लगें, इसके लिए आप नाखूनों को अच्छी तरह फाइल करें। फिर अपने फुटवियर्स से मैच करता नेल पेंट लगाएं। नेल पेंट सूखने के बाद ही फुटवियर्स पहनें। इस मौसम में बैली या जूती पहनने से बचें। इन्हें पहनने से आपको गर्मी ज्यादा लगेगी। इस मौसम में स्ट्रैप्स वाले सैंडल कैरी करें। अगर आप कैजुअल लुक चाहती हैं, तो फ्लिप-फ्लॉप सैंडल पहन सकती हैं। वैसे, ओपन सैंडल पहनने के कई फायदे भी हैं। इससे पैरों को फ्रेश हवा मिलती है, जिससे पैरों में पसीना नहीं आता और बदबू भी नहीं होती। फिर पैरों में गर्मी न लगने से पूरी बॉडी कूल रहती है।

सेहत के लिए जरूरी है नींद



जिंदगी के लिए आहार, निद्रा और मैथुन तीन प्राकृतिक कर्म माने गए हैं। शेक्सपीयर ने नींद को जिंदगी का सबसे महान पोषक माना है। यह तो हम सभी जानते हैं कि शरीर, मन और आत्मा को स्वस्थ रखने के लिए नींद और आराम निहायत जरूरी है, लेकिन ऐसे कितने भाग्यवान लोग हैं, जिन्हें रातभर चैन की नींद आती है?

प्राचीन समय से ही स्वस्थ रहने के नियमों में सबसे पहला स्थान नींद का रहा है। मानव शरीर की यही खासियत है कि दिनभर की शारीरिक थकान की भरपाई रातभर की नींद में पूरी हो जाती है। जो लोग रात में नहीं सोते उन्हें किसी न किसी तरह दिन में इसकी भरपाई करना जरूरी होता है। हर साल लाखों सड़क दुर्घटनाएँ उनींदे ड्राइवरों के कारण होती हैं।

* कितनी नींद जरूरी

इस पर कई मतभेद हैं। आधुनिक युग से पहले यानी 1920 के आसपास यूके में माना जाता था कि 9 घंटे की नींद तरोताजा रहने के लिए जरूरी है। अब ऐसा नहीं है। अब साढ़े सात घंटे की नींद को ही विशेषज्ञ पर्याप्त मानते हैं। कई विद्वानों का मानना है कि 6 घंटे की नींद वयस्क मानव शरीर के लिए पर्याप्त है। शर्त यही है कि उसे नींद दवाओं की मदद से नहीं, बल्कि प्राकृतिक रूप से आए।

* क्या होती है नींद

नींद के कई चरण होते हैं। मात्र दस मिनट में ही जागृत अवस्था के हल्की नींद की ओर जाने को स्टेज वन श्रेणी की नींद माना गया है। स्टेज टू पहले से गहरी होती है, जो 20 मिनट तक रहती है। नींद के तीसरे और चौथे चरण को गहरी नींद माना गया है। नींद के इसी हिस्से में शरीर और दिमाग को आराम मिलता है और दिनभर की थकान मिटती है। नींद के इस हिस्से में दिमाग से डेल्टा लहरें उत्पन्न होती हैं, इसलिए इसे डेल्टा वेव भी कहा जाता है। इस अवधि में कोई सपने नहीं आते। 90 मिनट की गहरी नींद के बाद रैपिड आई मूवमेंट शुरू होता है। सामान्य नींद में लोग इसके कई बार कई चरणों से होकर गुजरते हैं। दिक्कत तब उत्पन्न होती है, जब यह पैटर्न बदल जाता है।

* नींद का दुरुपयोग

आधुनिक युग में नींद का सबसे अधिक दुरुपयोग किया जाता है। लोग बेडरूम का इस्तेमाल सिर्फ सोने के लिए नहीं, बल्कि दूसरे कामों के लिए भी करने लगे हैं। अक्सर शिकायत करते हैं कि रात को देर से खाते हैं, इसलिए जागना पड़ता है। कई बार पालक यह शिकायत करते हैं कि बच्चे जगते रहते हैं, इसलिए हमें भी जागना पड़ता है। यह प्रकृति की नियामत का दुरुपयोग है।



टीवी सीरियल देखना या देर रात तक फिल्में देखने से नींद का पैटर्न बदल जाता है। दिन भर की थकावट निकल ही नहीं पाती है और दूसरा दिन सामने आ खड़ा होता है। जब रात में नींद ठीक से नहीं होती है तब चिड़चिड़ापन घर करने लगता है। एसीडिटी तथा अन्य शारीरिक समस्याएँ तो साथ आती ही हैं। अक्सर देखा गया है कि जो लोग रात को भरपूर नींद नहीं सोते, उन्हें दिन में नींद के झोंके आते रहते हैं। शरीर किसी न किसी तरह अपने नींद के कोटे की भरपाई कर लेना चाहता है, लेकिन आधुनिक जीवन की जरूरतें उसे पीछे धकेलती रहती है।

* नहीं होती नुकसान की भरपाई

नींद की कमी की भरपाई होना मुश्किल होता है। यदि आप सोमवार से शुक्रवार तक काम में मसरूफ रहते हैं और रातों की नींद के कुछ घंटों की बलि चढ़ा देते हैं तो उसकी भरपाई शनिवार को चंद घंटे अधिक सोने से नहीं होगी। नींद के विषय को गंभीरता से लेना जरूरी है। ताकि मन और शरीर स्वस्थ बना रहे। कार्यकुशलता और क्षमता भी बरकरार रहे। थकान के कारण शरीर पूरी क्षमता से काम नहीं करता है।

दवाओं का दुरुपयोग

नींद की कमी को पूरा करने के लिए नींद लाने वाली दवाओं का सेवन करते हैं, किन्तु इनसे मिलने वाली नींद साधारण नींद ना होकर नशा होती है। इसमें नींद के प्राकृतिक गुण नहीं होते। इससे नींद से मिलने वाले लाभों से वंचित रह जाते हैं।

सावधानी:

* खाना जल्दी खाएँ।

* दूध में शहद डाल कर पीने से नींद अच्छी आती है।

* संतोषी मन बना कर सोएँ तो अच्छी नींद आएगी।

* रात को स्नान करके सोने से भी नींद अच्छी आ सकती है

मंगलवार, 26 मई 2009

अब भैंस खाएगी हर्बल बिस्किट



छिंदवा़ड़ा। चारा, भूसा और खली-चुनी के साथ अब गाय भैसों को जायकेदार "हर्बल बिस्किट" खाने को मिलेंगे। 16 किस्मों की जड़ी-बूटी से तैयार यह बिस्किट दुधारू पशुओं की दूध क्षमता ब़ढ़ाने में सहयोगी साबित होगा। पातालकोट में निवास करने वाले आदिवासी भुमकाओं के पारंपरिक ज्ञान को मूर्तरूप देकर छिंदवा़ड़ा निवासी डॉ. दीपक आचार्य ने औषधीय विज्ञान की दुनिया में एक प्रभावी सफलता हासिल की है।

जिले के पहुँचविहीन गाँवों में आदिवासी समाज के भुमका अपने पारंपरिक ज्ञान से मनुष्य और जानवरों की लाइलाज बीमारियों का उपचार देशी ज़ड़ी-बूटियों के सहारे करते हैं। ग्रामीण संस्कृति के इस अनमोल ज्ञान को सहेजने के लिए छिंदवा़ड़ा निवासी डॉ. दीपक आचार्य दस साल से पातालकोट क्षेत्र में रहने वाले भुमकाओं के पारंपरिक औषधीय ज्ञान का अध्ययन करते रहे। उन्होंने इस अवधि में लगभग बीस हजार नुस्खे और हर्बल फार्मूले एकत्र किए। अपना जीवन आदिवासियों के पारंपरिक ज्ञान और औषधीय विज्ञान को समर्पित करते हुए डॉ. दीपक ने समस्त नुस्खों और फार्मूलों का पेटेंट भुमकाओं के नाम करा लिया।

यह उत्पाद एक उत्प्रेरक की तरह कार्य करता है, जो जानवर की पाचक क्षमता और दूध बनाने की प्रक्रिया का ब़ढ़ाता है। प्रतिदिन दो बिस्किट रोटी में जानवरों को आसानी से खिलाए जा सकते हैं।
- डॉ. दीपक आचार्य

क्या है बिस्किट में

यह बिस्किट 16 किस्म की ज़ड़ी-बूटियों से तैयार किया गया। इसमें खैर, बबूल, शतावरी, धनिया, अजवायन, सौंफ, गन्ना, महुआ, बिदारी कंद, तिल, सुर्पखा, गुडुची, हर्रा, जीवंती, आँवला और जीरा शामिल है।
- जगदीश पंवार
साभार - वेबदुनिया. कॉम
 

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